चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में दो दिवसीय पुस्तक मेले का भव्य शुभारंभ ज्ञान के उत्सव के रूप में चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में दो दिवसीय पुस्तक मेला शुरू “पुस्तकें जीवन की सच्ची मार्गदर्शक हैं” — प्रो. राम पाल सैनी

February 11, 2026

चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय परिसर में आज से दो दिवसीय पुस्तक मेले का भव्य एवं गरिमामयी शुभारंभ किया गया। इस ज्ञानवर्धक आयोजन का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी ने दीप प्रज्वलन कर किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारीगण, शिक्षकगण, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि पुस्तकें मानव जीवन की सच्ची मित्र होती हैं, जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को पुस्तक मेले का अधिक से अधिक भ्रमण करने, श्रेष्ठ साहित्य एवं ज्ञानवर्धक पुस्तकों को पढ़ने तथा प्रतियोगी परीक्षाओं, शैक्षणिक उन्नति और व्यक्तित्व विकास के लिए पुस्तकों को नियमित जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।

कुलगुरु प्रो. सैनी ने कहा कि पुस्तकें केवल ज्ञान का साधन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली सच्ची मार्गदर्शक होती हैं। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी पुस्तकों से मित्रता करता है, वह कभी असफल नहीं होता। पुस्तकें सोचने की शक्ति को विकसित करती हैं और व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाती हैं।

कुलगुरु ने विद्यार्थियों को पुस्तक मेले का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, शैक्षणिक उत्कृष्टता और व्यक्तित्व विकास के लिए पुस्तकों का अध्ययन अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में भले ही सूचनाएँ मोबाइल और इंटरनेट पर उपलब्ध हों, लेकिन पुस्तकों से प्राप्त ज्ञान स्थायी, गहन और जीवन भर उपयोगी होता है।

उन्होंने आगे कहा कि पुस्तक मेला विद्यार्थियों के लिए एक ऐसा मंच है, जहाँ वे विभिन्न विषयों की श्रेष्ठ पुस्तकों से एक ही स्थान पर परिचित हो सकते हैं। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत को मजबूत करते हैं और उन्हें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

कुलगुरु प्रो. सैनी ने कहा कि युवा पीढ़ी को पुस्तकों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, क्योंकि एक जागरूक पाठक ही एक जिम्मेदार नागरिक बन सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे पुस्तक मेले में उपलब्ध पुस्तकों का चयन सोच-समझकर करें और नियमित अध्ययन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएँ।

उन्होंने कहा कि तकनीक के इस युग में भी पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है, बल्कि पुस्तकों के माध्यम से ही स्थायी और गहन ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।

वहीं कुलसचिव डॉ. राजेश बंसल ने अपने वक्तव्य में कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने का केंद्र नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और संस्कृति का संवाहक होता है। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेले जैसे आयोजनों से विद्यार्थियों में बौद्धिक विकास के साथ-साथ सकारात्मक सोच और अनुशासन की भावना का भी विकास होता है। उन्होंने पुस्तक मेले के सफल आयोजन के लिए पुस्तकालय विभाग एवं आयोजन समिति की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार ने पुस्तक मेले की आवश्यकता एवं उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में पठन-पाठन की संस्कृति को मजबूत करते हैं। उन्होंने बताया कि पुस्तक मेला विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को एक ही स्थान पर विभिन्न विषयों की नवीनतम एवं उपयोगी पुस्तकों से परिचित होने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे पुस्तक मेले का भरपूर लाभ उठाएँ।

इस दो दिवसीय पुस्तक मेले में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित प्रकाशकों द्वारा शैक्षणिक पुस्तकों, प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित सामग्री, शोध ग्रंथ, साहित्य, सामान्य ज्ञान एवं संदर्भ पुस्तकों की विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की गई है। पुस्तक मेले में विद्यार्थियों के लिए विशेष छूट की व्यवस्था भी की गई है, जिससे वे अधिक से अधिक पुस्तकें खरीद सकें।

पुस्तक मेले के उद्घाटन अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने पुस्तक स्टॉलों का भ्रमण कर अपनी रुचि की पुस्तकों का चयन किया। यह पुस्तक मेला न केवल ज्ञान का उत्सव है, बल्कि विद्यार्थियों को अध्ययन के प्रति प्रेरित करने की दिशा में एक सार्थक पहल भी है।