वैज्ञानिक सोच से ही राष्ट्र निर्माण संभव- प्रो. अनुरिका शर्मा
चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के मार्गदर्शन में विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य, ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना, अनुसंधान के प्रति रुचि उत्पन्न करना तथा विज्ञान की सामाजिक उपयोगिता को रेखांकित करना था।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र की प्रख्यात शिक्षाविद एवं वैज्ञानिक प्रो. अनुरिका शर्मा ने शिरकत की। कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. राजेश बंसल, विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद मलिक, डॉ. निशा देओपा, डॉ. सुनील रोहिल्ला सहित अन्य संकाय सदस्य, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
मुख्य वक्ता प्रो. अनुरिका शर्मा ने अपने विस्तृत एवं प्रेरणादायक व्याख्यान में बताया कि राष्ट्रीय विज्ञान दिवस प्रत्येक वर्ष 28 फरवरी को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन महान भारतीय वैज्ञानिक C. V. Raman ने ‘रमन प्रभाव’ की खोज की थी, जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि यह दिवस हमें भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान को याद करने और नई पीढ़ी को विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने का अवसर प्रदान करता है।
प्रो. शर्मा ने अपने व्याख्यान में विज्ञान के ऐतिहासिक विकास, आधुनिक शोध प्रवृत्तियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान, चिकित्सा अनुसंधान, डिजिटल तकनीक, पर्यावरण संरक्षण और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन, निर्णय क्षमता और समस्या समाधान की प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि जिज्ञासा ही विज्ञान की जननी है। यदि विद्यार्थी प्रश्न पूछने की आदत विकसित करें और तथ्यों के आधार पर सोचें, तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने शोध में नैतिकता, धैर्य और निरंतरता के महत्व को भी रेखांकित किया तथा युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रहने का संदेश दिया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय कुलसचिव डॉ. राजेश बंसल ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए मुख्य वक्ता एवं सभी अतिथियों का अभिनंदन किया। उन्होंने अपने संबोधन में विज्ञान और शोध की वर्तमान समय में बढ़ती आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति वैज्ञानिक सोच, नवाचार और तकनीकी विकास पर निर्भर करती है। भारत आज वैश्विक स्तर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी सशक्त पहचान बना रहा है, जिसमें युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुसंधान, नवाचार एवं स्टार्टअप संस्कृति से जुड़ने का आह्वान किया।
विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद मलिक ने मुख्य वक्ता, अतिथियों एवं उपस्थित सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे व्याख्यान विद्यार्थियों के बौद्धिक एवं शोध कौशल को विकसित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के आयोजन विश्वविद्यालय में शोध संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने विज्ञान, शोध एवं करियर से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे। मुख्य वक्ता ने सभी जिज्ञासाओं का विस्तार पूर्वक समाधान किया।
इस प्रकार राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का यह आयोजन विश्वविद्यालय परिसर में वैज्ञानिक चेतना, नवाचार और अनुसंधान की भावना को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण एवं सफल प्रयास सिद्ध हुआ।
