संगीत विभाग द्वारा “शास्त्रीय संगीत में कंठ साधना का महत्व” विषय पर एक विस्तार व्याख्यान (Extension Lecture) का सफल आयोजन किया

April 8, 2026

चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के कुशल मार्गदर्शन में संगीत विभाग द्वारा “शास्त्रीय संगीत में कंठ साधना का महत्व” विषय पर एक विस्तार व्याख्यान (Extension Lecture) का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विभागाध्यक्ष डॉ. जसबीर सिंह के कुशल निर्देशन में संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को शास्त्रीय संगीत की गहनताओं तथा कंठ साधना के महत्व से अवगत कराना था।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. भूपेंद्र मल्होत्रा ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

अपने व्याख्यान में उन्होंने शास्त्रीय संगीत में कंठ साधना की अनिवार्यता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि एक श्रेष्ठ गायक बनने के लिए नियमित अभ्यास, स्वर शुद्धता, लय की समझ और मानसिक एकाग्रता अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को विभिन्न तकनीकों के माध्यम से कंठ को सुदृढ़ करने के उपाय भी बताए और रियाज के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि निरंतर अभ्यास ही कलाकार को उत्कृष्टता की ओर ले जाता है।

कार्यक्रम के दौरान संगीत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जसबीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं, क्योंकि इससे उन्हें विशेषज्ञों के अनुभवों से सीखने का अवसर मिलता है। उन्होंने विद्यार्थियों को संगीत के प्रति समर्पण और अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

विभाग की इंचार्ज डॉ. भावना ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कंठ साधना शास्त्रीय संगीत की आत्मा है, और इसके माध्यम से ही एक कलाकार अपनी अभिव्यक्ति को प्रभावी बना सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास करने और गुरुजनों के मार्गदर्शन में अपनी प्रतिभा को निखारने का आह्वान किया।

इस अवसर पर डॉ. कृष्ण, डॉ. कविता, डॉ. राम दिया तथा डॉ. राकेश भी उपस्थित रहे और उन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक बताया।

यह विस्तार व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ, जिसने उन्हें शास्त्रीय संगीत में कंठ साधना के महत्व को समझने और उसे अपने अभ्यास में अपनाने के लिए प्रेरित किया।