चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के मार्गदर्शन में रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल द्वारा एक सप्ताह की रिसर्च मेथोडोलॉजी कार्यशाला का आयोजन |

December 23, 2025

कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी ने कहा कि शोध की गुणवत्ता विश्वविद्यालय के लिए सर्वोपरि है। विश्वविद्यालय में शोध को बढ़ावा देने के लिए जिस भी प्रकार के सहयोग की आवश्यकता होगी, उसके लिए वे सदैव तत्पर रहेंगे।

चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल द्वारा रिसर्च मेथाडोलॉजी विषय पर एक सप्ताह की कार्यशाला का आरंभ किया गया। कार्यशाला के पहले दिन उद्घाटन सत्र के दौरान शोधार्थियों को रिसर्च मेथोडोलॉजी कार्यशाला के महत्व के बारे में बताया गया। उद्घाटन सत्र में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग से सेवानिवृत्त प्रो. उम्मेद सिंह ने विद्यार्थियों को शोध के विभिन्न प्रकारों एवं शोध को किस प्रकार आगे बढ़ाया जाता है, इस विषय में जानकारी दी।

कार्यशाला के दूसरे दिन प्रथम सत्र में प्रो. सी. आर. दरौलिया ने नए विद्यार्थियों को डाटा किस प्रकार एकत्रित किया जाता है, इस संबंध में जानकारी दी तथा प्रश्नावली बनाने की विधि को विस्तार से समझाया। इसी दिन दूसरे सत्र में केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ से प्रो. फूल सिंह ने शोधार्थियों को शोध समस्या की रूपरेखा एवं शोध उद्देश्यों को परिभाषित करने के विषय में विस्तृत जानकारी प्रदान की।

कार्यशाला के तीसरे दिन प्रथम सत्र में डीन रिसर्च, चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय के डॉ. अनुपम भाटिया ने विद्यार्थियों को संख्यक विज्ञान एवं शोध के अनुसार विभिन्न सांख्यिकीय उपकरणों का प्रयोग कब और कहाँ किया जाना चाहिए, इसके बारे में जानकारी दी। इसके पश्चात दूसरे सत्र में पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला से प्रो. हिमांशु अग्रवाल ने पूर्व में हुए शोध में कमियाँ ढूँढने एवं उनके आधार पर शोध प्रश्न तैयार करने की विधियों को समझाया।

कार्यशाला के चौथे दिन जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से प्रो. एन. एच. मौलिक ने शोध प्रशासन में नैतिकता के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। दूसरे सत्र में प्रोफेसर मनसब आलम ने शोध में साहित्यिक चोरी एवं अनैतिक कार्यों से बचने के उपायों के बारे में सूत्र बताए।

कार्यशाला के पांचवें दिन IIIT नई दिल्ली से प्रो. विक्रम गोयल ने प्रणालीबद्ध साहित्य समीक्षा की जानकारी दी। दूसरे सत्र में चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय से प्रो विक्रम सिंह ने शोध में रेफरेंसिंग एवं साइटेशन किस प्रकार किया जाता है, इसके बारे में विस्तार से बताया।

कार्यशाला के छठे दिन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से प्रो. राकेश कुमार ने विद्यार्थियों को स्वतंत्र, मौलिक, व्यवस्थित एवं क्रमबद्ध रूप से शोध प्रस्तुत करने हेतु थीसिस लेखन की प्रक्रिया के बारे में बताया। दूसरे सत्र में थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, पटियाला से प्रो. अनिल कुमार वर्मा ने शोध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

कार्यशाला के सातवें दिन इंदिरा गांधी दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय से प्रो. ए. के. मोहपात्रा देव ने विद्यार्थियों को शोध पत्र की संरचना के विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तार से बताया।

कार्यशाला के समापन सत्र में डीन रिसर्च ने कहा कि विश्वविद्यालय में शोध को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन निरंतर किया जाता रहेगा।