चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में योग विज्ञान विभाग में वैकल्पिक चिकित्सा कार्यशाला का आयोजन करवाया गया।
चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में योग विज्ञान विभाग में वैकल्पिक चिकित्सा कार्यशाला का आयोजन करवाया गया।
विभाग प्रभारी डॉ. वीरेंद्र कुमार जी ने कार्यशाला के लिए आमंत्रित किए गए लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह (सेवानिवृत्त) से परिचित करवाया। उनकी एक्यूप्रेशर, सुजोक, प्राकृतिक चिकित्सा और अन्य वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों में विशेषज्ञता हैं। उन्होंने बीटेक (सिविल),एम. टेक एलएलबी., बीए. (मनोविज्ञान, राजनीतिक विज्ञान) एमए. समाजशास्त्र, एक्यूप्रेशर, सुजोक, प्राकृतिक चिकित्सा, योग में विशेषज्ञ, होम्योपैथी, वाणिज्य और कई
अन्य विषयों का अच्छा ज्ञान प्राप्त है।
लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह जी ने बताया कि मनुष्य बहुत बड़ी ऊर्जा का केंद्र है वह जो चाहे दृढ़ निश्चय करके कर सकता है। पूरी प्रकृति व परमात्मा की कृपा से वैसे स्थितियां बनने लगती हैं। अपने आप एवं परमात्मा की शक्ति का आकलन करना ही ध्यान है सत्य और परमात्मा में पूर्ण विश्वास होना चाहिए ध्यान के समय उस शक्ति से स्वत: आदेश प्राप्त होते हैं। मनुष्य ऊर्जा का केंद्र है जिसमें सभी के अपने-अपने लक्ष्य हैं अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सर्वप्रथम अपने लक्ष्य में स्पष्टता होनी चाहिए उसकी योजना लिखित रूप में तैयार करनी चाहिए उसका निरंतर अभ्यास दृढ़ संकल्पी होकर करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों ही आवश्यक है। जिसमें शारीरिक स्वच्छता के लिए एक्यूप्रेशर एवं प्राकृतिक चिकित्सा कार्य करती है। उन्होंने कहा कि बीमारी हमारे शरीर में पड़े हुए फालतू तत्वों से होती है जो हमने स्वयं डाले हुए होते हैं यह शरीर का एक बोझ है जिसे दूर करने पर वह स्वस्थ हो जाता है। एक्यूप्रेशर से पहले प्राकृतिक चिकित्सा अनिवार्य है। प्राकृतिक चिकित्सा में मुख्य रूप से शामिल है कभी भी भूख के बिना न खाए, शुद्ध विचार रखें तथा प्रकृति के अनुकूल रहना चाहिए।
एक्यूप्रेशर चिकित्सा के बारे में वह बताते हैं कि जीवनी शक्ति एक ही है इसके द्वारा जीवनी शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। इससे छोटे से छोटे और बड़े से बड़े रोग को दूर किया जा सकता है। उन्होंने एक्यूप्रेशर के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु सायटिका, कमर दर्द, थायराइड, शुगर, बीपी, माइग्रेन, डिप्रेशन, हृदय रोग आदि के लिए विद्यार्थियों को बताया।
इस अवसर पर विभाग प्राध्यापक और क्लर्क उपस्थित रहे।
