तुल्य भारत के अंतर्गत सी.आर.एस.यू. में सजा लोक संस्कृति का रंगमंच कार्यक्रम के पहले दिन लगभग 100 कलाकारों ने दी प्रस्तुति

March 17, 2026

जींद, 16 मार्च अतुल्य भारत कार्यक्रम के अंतर्गत चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय फोक डांस फेस्टिवल का भव्य आगाज हुआ। यह सांस्कृतिक उत्सव 16 मार्च से 18 मार्च तक आयोजित किया जा रहा है , कार्यक्रम के पहले दिन देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 100 कलाकारों ने अपनी पारंपरिक लोक नृत्य शैलियों की आकर्षक दी।

सांस्कृतिक उत्सव के उद्घाटन अवसर पर समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा ने उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र प्रयागराज का धन्यवाद करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन भारत की समृद्ध लोक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने बड़ा माध्यम हैं। इन कार्यक्रमों से विभिन्न राज्यों की संस्कृति, परंपराओं और लोक जीवन के बारे में जानने का अवसर मिलता है साथ ही यह मंच लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा दर्शाने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। इस आयोजन का उद्देश्य भारत की समृद्ध लोक परंपराओं, जनजातीय संस्कृति और विविध सांस्कृतिक धरोहर को एक मंच पर प्रस्तुत करना है।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजेश बंसल ने अपने संबोधन में कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम किसी भी शैक्षणिक संस्थान की आत्मा होते हैं। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है और उनमें आत्मविश्वास, रचनात्मकता तथा नेतृत्व क्षमता का विकास होता है।

कार्यक्रम के समन्वयक डा. कृष्ण कुमार ने सोमवार को यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि यह आयोजन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज और चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय के संयुक्त के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना भी है। वर्तमान आधुनिक और तकनीकी युग में कई बार युवा अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में “अतुल्य भारत” जैसे कार्यक्रम उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने और उस पर गर्व करने के लिए प्रेरित करता है ।

इस भव्य सांस्कृतिक महोत्सव के प्रथम दिन देशभर के विभिन्न राज्यों मध्य प्रदेश, नागालैंड, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। इन कलाकारों ने अपने-अपने राज्यों की पारंपरिक लोक नृत्य शैलियों जैसे जनजातीय नृत्य, क्षेत्रीय सांस्कृतिक नृत्य और लोकगीतों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविधता को पेश किया।

चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के निदेशक व कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डा. अनिल कुमार ने बताया विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के दिशा निर्देशन में विश्वविद्यालय लोक विधाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में कार्यक्रम का यह आयोजन किया जा रहा है।

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क विभाग के निदेशक डॉ. विजय कुमार इस तीन दिवसीय समारोह के पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं।

इस दौरान तीन दिवसीय इस सांस्कृतिक महोत्सव में रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ-साथ कलाकारों और विद्यार्थियों के बीच संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी हो रहा है। कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति दे रहे कलाकारों ने कहा कि हमारे जैसे लोक कलाकारों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ है, जो दर्शकों के लिए भारत की बहुरंगी सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने और समझने का अनूठा अवसर प्रदान कर रहा है तो वहीं चौ.रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में आकर हमें भी बहुत कुछ सीखने का मौका मिल रहा है।

विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, लोक नृत्य और लोक संगीत की रही धूम....

इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आई टीमों ने अपनी-अपनी पारंपरिक लोक कलाओं की शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों, वाद्ययंत्रों और आकर्षक नृत्य शैलियों से पूरा वातावरण सांस्कृतिक रंग में रंग गया। कार्यक्रम के दौरान दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश की टीम ने अपने फोक बैंड के माध्यम से लोक संगीत की मधुर धुनें पेश कीं। ढोलक, हारमोनियम और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की संगत पर गाए गए लोकगीतों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। हरियाणा की टीम ने पारंपरिक ‘घूमर’ नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान कलाकारों ने लयबद्ध अंदाज में घूमर की प्रस्तुति दी, जिसने उपस्थित दर्शकों को खूब आकर्षित किया। उत्तर प्रदेश की टीम ने ‘मयूर नाच’ और ‘फूलों की होली’ की शानदार प्रस्तुति दी। मयूर नृत्य में कलाकारों ने मोर की भाव भंगिमा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया, वहीं फूलों की होली की प्रस्तुति ने ब्रज की पारंपरिक होली की याद दिलाई। उत्तराखंड से यहां पहुंची टीम ने प्रसिद्ध लोकनृत्य ‘छपेली’ प्रस्तुत किया। इस नृत्य में कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीतों की धुन पर आकर्षक नृत्य कर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। राजस्थान की टीम ने ‘चरी’ और ‘घूमर’ नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। चरी नृत्य में महिला कलाकारों ने सिर पर जलती हुई दीपों से सजी चरी रखकर संतुलन के साथ नृत्य किया, जो कार्यक्रम का विशेष आकर्षण का केंद्र बिंदु रहा। वहीं घूमर की प्रस्तुति ने राजस्थानी संस्कृति की झलक पेश की। इसके अलावा नागालैंड की टीम ने अपने पारंपरिक लोक नृत्य से कार्यक्रम में चार चांद लगाए। कलाकारों ने पारंपरिक पोशाक और युद्ध शैली की झलक लिए नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध संस्कृति से रूबरू कराया। कार्यक्रम के दौरान दर्शक कलाकारों की प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लेते नजर आए। विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झलकियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।