भारतीय राजदूत से मुलाकात के बाद जापान की 06 प्रमुख यूनिवर्सिटीज से हुए MoU (समझौता ज्ञापन), खुलेंगे सीआरएसयू के छात्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय अवसर- प्रो. (डॉ.) राम पाल सैनी
जापान की राजधानी टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास (Embassy of India, Tokyo) में भारतीय राजदूत से शिष्टाचार भेंट के साथ चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद की वैश्विक शैक्षणिक एवं शोध यात्रा का औपचारिक शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. (डॉ.) राम पाल सैनी के नेतृत्व में गए उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भारत–जापान शैक्षणिक सहयोग, शोध साझेदारी और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा की।
भारतीय दूतावास में हुई इस बैठक के पश्चात सीआरएसयू प्रतिनिधिमंडल ने जापान की कई प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज और शैक्षणिक संस्थानों के साथ व्यापक संवाद किया, जिसके परिणामस्वरूप क्योटो विश्वविद्यालय, ओसाका सहित 06 अग्रणी जापानी विश्वविद्यालयों ने सीआरएसयू के साथ शिक्षण, शोध और तकनीकी सहयोग के लिए औपचारिक प्रस्ताव दिए। इन बैठकों में उच्च शिक्षा ब्यूरो, जापान के निदेशक, अंतर्राष्ट्रीय मामले श्री SATO Kuniaki तथा शिक्षा, संस्कृति और खेल मंत्रालय, जापान के Hamaya Akigo भी शामिल रहे।
कुलगुरु प्रो. (डॉ.) रामपाल सैनी ने जापानी विश्वविद्यालयों के समक्ष सीआरएसयू का दीर्घकालिक शैक्षणिक विज़न, राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 (NEP-2020) के अनुरूप नवाचार, तथा विकसित भारत के संकल्प में विश्वविद्यालय की भूमिका को विस्तार से प्रस्तुत किया। सीआरएसयू में संचालित शोध कार्यों, अकादमिक गुणवत्ता और डिजिटल अवसंरचना से जापानी विश्वविद्यालय अत्यंत प्रभावित हुए और उन्होंने संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति व्यक्त की।
इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, संयुक्त प्रयोगशालाएं, रिसर्च प्रोजेक्ट्स, अकादमिक व फैकल्टी एक्सचेंज, डिजिटल कनेक्टिविटी, क्लीन एवं ग्रीन फ्यूल, पर्यावरण संरक्षण, आर्थिक विकास जैसे क्षेत्रों में संयुक्त कार्य किया जाएगा। इसके साथ ही सीआरएसयू में इन्क्यूबेशन सेंटर्स की स्थापना, आधुनिक एवं डिजिटल सेंट्रल लाइब्रेरी तथा स्मार्ट अकादमिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी सहयोग होगा।
कुलगुरु प्रो. (डॉ.) राम पाल सैनी ने कहा कि जापान की यूनिवर्सिटीज ने सीआरएसयू के छात्रों के लिए अपने द्वार खोल दिए हैं। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुख कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर सक्षम बनाया जाएगा। यह साझेदारी शोध और तकनीक के क्षेत्र में सीआरएसयू की एक नई अंतरराष्ट्रीय यात्रा की शुरुआत है।
उन्होंने विश्वास जताया कि यह सहयोग न केवल विश्वविद्यालय को वैश्विक पहचान देगा, बल्कि हरियाणा के विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा, शोध और रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करेगा।
