सीआरएसयू के हिन्दी विभाग में शैक्षणिक ऑडिट, गुणवत्ता और तकनीकी एकीकरण पर विशेष बल

March 2, 2026

जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में शैक्षणिक उत्कृष्टता, पाठ्यचर्या की प्रभावशीलता तथा शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं के सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से शैक्षणिक ऑडिट का सफल आयोजन किया गया। यह ऑडिट विश्वविद्यालय के कुलगुरु राम पाल सैनी के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप व्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।

ऑडिट के दौरान विभाग की पाठ्यचर्या, शोध गतिविधियों, नवाचार, विद्यार्थी सहभागिता तथा स्थानीय लोक-सांस्कृतिक संसाधनों के उपयोग का समग्र मूल्यांकन किया गया। विषय विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित प्रो. कामराज सिन्धु एवं पूनम मोर ने विभाग की शैक्षणिक उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि हिन्दी विभाग में अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि विभाग के अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़े हैं, जिसके कारण उनमें लोकजीवन, लोकभाषा और संवेदनात्मक साहित्य को समझने की अद्वितीय क्षमता विकसित हुई है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि हिन्दी भाषा और साहित्य को डिजिटल तकनीक, ई-सामग्री, वेब पत्रकारिता, मोबाइल पत्रकारिता तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित भाषा उपकरणों से जोड़कर विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जाए।

ऑडिट में यह भी रेखांकित किया गया कि हिन्दी विभाग लोक साहित्य, क्षेत्रीय सांस्कृतिक परंपराओं और आधुनिक साहित्यिक विमर्शों को समाहित करते हुए भाषा की सामाजिक भूमिका को सुदृढ़ कर सकता है। डिजिटल अभिलेखीकरण, लोक साहित्य के ऑडियो-विजुअल दस्तावेजीकरण तथा ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभाग शोध एवं शिक्षण की नई दिशाएँ विकसित कर सकता है।

विभागाध्यक्ष सुनील फौगाट ने विशेषज्ञों के सुझावों का स्वागत करते हुए आश्वासन दिया कि आने वाले समय में विभाग तकनीकी नवाचार, अंतःविषयी शोध तथा कौशल-आधारित पाठ्यक्रमों के माध्यम से हिन्दी अध्ययन को अधिक समृद्ध एवं प्रासंगिक बनाएगा। उन्होंने बताया कि विभाग में डिजिटल कंटेंट निर्माण, लोक साहित्य के संरक्षण और विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाएगी।

इस अवसर पर यह निष्कर्ष सामने आया कि हिन्दी भाषा केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति का माध्यम ही नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदना, सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा का सशक्त वाहक है। आधुनिक तकनीक के साथ इसके समन्वय से न केवल शिक्षण की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में भी सहायता मिलेगी। शैक्षणिक ऑडिट को विभाग के सतत विकास, गुणवत्ता आश्वासन तथा नवाचार-उन्मुख शैक्षणिक वातावरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया