58 टीमों ने मंच पर बिखेरे हरियाणवी रंग, नामचीन कलाकारों की उपस्थिति से कार्यक्रम में चार चाँद

November 30, 2025

चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय (सीआरएसयू), जींद में आयोजित तीन दिवसीय हरियाणा दिवस समारोह का दूसरा दिन कला, संस्कृति, अनुष्ठान और उत्सव की दृष्टि से एक अविस्मरणीय अवसर बन गया। परिसर का वातावरण सुबह से ही लोक-संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा, रंग-बिरंगे परिधानों, ढोल की थाप और विद्यार्थियों के उल्लासपूर्ण उत्साह से सराबोर रहा। प्रदेशभर से आई युवा प्रतिभाओं के पारंपरिक गीत, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों ने हरियाणा की विरासत को एक नए स्वर और नए विस्तार के साथ जीवंत कर दिया।
समारोह के दूसरे दिन कुल 58 टीमों ने पंजीकरण करवाया और सभी टीमों ने अत्यंत उत्साहपूर्ण भागीदारी के साथ हरियाणवी संस्कृति के विभिन्न आयामों को मंच पर प्रस्तुत किया। प्रत्येक प्रस्तुति एक से बढ़कर एक थी—कहीं हरियाणवी डांस की फुर्ती और ऊर्जा ने दर्शकों को रोमांचित किया, तो कहीं स्किट में म और मोनो एक्टिंग में प्रदेश की लोककथाओं, सामाजिक मान्यताओं और जीवन-संघर्षों को संवेदनशीलता से उकेरा गया। रसिया ग्रुप डांस, हरियाणवी पॉप सॉन्ग, हरियाणवी भजन, ग़ज़ल, लोक-कॉस्ट्यूम परेड, ऑन द स्पॉट पेंटिंग और वन एक्ट प्ले जैसी प्रतियोगिताओं ने पूरे विश्वविद्यालय को संस्कृति के दिव्य रंगों से भर दिया। विद्यार्थियों के जोश और रचनात्मकता से पूरा परिसर एक जीवंत संस्कृति उत्सव में बदल गया।
दिन का विशेष आकर्षण हरियाणवी संगीत जगत के लोकप्रिय कलाकार अमित ढुल और सुमित सैनी रहे, जिनके आगमन से कार्यक्रम की रौनक कई गुना बढ़ गई। अमित ढुल और सुमित सैनी के मंच पर प्रवेश करते ही दोनों कलाकारों ने ऊर्जा, उत्साह और जोश की तरंग पूरे समारोह में प्रवाहित कर दी। अमित ढुल ने अपने चर्चित व लोकप्रिय गीत “कितै भी घुमादा कौनी, कीतै भी लै जांदा कोनी, जीन्द आले तू’ से छात्रा-छात्राओं में जोश भर गया। ओर पूरे उत्सव के माहौल को जीवंत कर दिया। वहीं सुमित सैनी की सुरीली आवाज़ में अपने अलग-अलग गीतों और लोकगीतों की धुनें दर्शकों के मन को छू गईं। उनकी प्रस्तुतियों के साथ दर्शक तालियों और हूटिंग से कार्यक्रम स्थल को गुंजायमान करते रहे। उपस्थित विद्यार्थियों ने कलाकारों के साथ झूमते हुए हरियाणवी संस्कृति के प्रति गर्व को महसूस किया।
सीआरएसयू के हरियाणा दिवस समारोह में आज राजनीतिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों ने शिरकत की, जिससे समारोह की गरिमा और बढ़ गई। मुख्य अतिथि के रूप में सफीदों विधायक माननीय श्री रामकुमार गौतम और उचाना विधायक श्री देवेंद्र अत्री ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अतिरिक्त सांस्कृतिक जगत, शिक्षा जगत व सामाजिक नेतृत्व का गौरवशाली प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अतिथियों — प्रो. दीप्ति धर्मानी, कुलपति, चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय भिवानी; प्रो. विजय अरोड़ा, कुलपति, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा; प्रो. असीम मिगलानी, कुलपति, इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर; तथा श्री अनूप लाठर, अध्यक्ष, युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम निदेशालय, दिल्ली विश्वविद्यालय — की मौजूदगी ने समारोह को विशिष्ट महत्व प्रदान किया। सभी अतिथियों का स्वागत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ॰) राम पाल सैनी द्वारा हरियाणवी परम्परा को निभाते हुए सॉल और मोमेंटो प्रदान कर किये।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्य सूचना आयुक्त हरियाणा श्री कर्मवीर सैनी,डॉ. प्लविंदर कौर, एशियाई कबड्डी फेडरेशन के अध्यक्ष श्री गुलाब सिंह सैनी, विधानसभा जींद के जनप्रतिनिधि श्री जवाहर सैनी, मेयर पानीपत श्रीमती कोमल सैनी, कैप्टन योगेश बैरागी (सामाजिक कार्यकर्ता), डॉ. राज सैनी (सामाजिक कार्यकर्ता), डॉ. दयानंद मलिक, डॉ. नरेंद्र चाहर, डॉ॰ धर्मदेव विद्यार्थी (निदेशक, हरियाणा साहित्य अकादमी) शामिल रहे। इन सभी अतिथियों के आगमन पर भी कुलगुरु ने सोल और मोमेंटो भेंट कर विश्वविद्यालय की परंपरा के अनुसार सम्मान प्रकट किया।
कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी ने अपने प्रेरक और ऊर्जा से भरे संबोधन में विद्यार्थियों की भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि “ऐसे सांस्कृतिक आयोजन शिक्षा, संस्कृति और व्यक्तित्व विकास—इन तीनों की समानांतर प्रगति का माध्यम हैं। हरियाणा महोत्सव हमारी संस्कृति, हमारी मिट्टी और हमारी विरासत का प्रतीक है, और इसे युवाओं तक पहुँचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।” उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय परिवार निरंतर प्रयास कर रहा है कि विद्यार्थियों के भीतर नवाचार, अनुशासन, नेतृत्व, सामाजिक उत्तरदायित्व और सांस्कृतिक चेतना का विकास हो।
मुख्य अतिथि सफीदों विधायक श्री रामकुमार गौतम ने कहा कि सीआरएसयू में आयोजित यह भव्य आयोजन हरियाणा की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि “यह महोत्सव केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि हमारी जड़ों से जुड़ने का अवसर है। हमें अपनी ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करना चाहिए और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना चाहिए।” उन्होंने विश्वविद्यालय को ऐसे आयोजन के लिए बधाई दी और छात्रों को समाज के लिए सकारात्मक योगदान देने का संदेश दिया।
उचाना विधायक श्री देवेंद्र अत्री ने कहा कि “हरियाणवी संस्कृति हमारी धरोहर है। हमें अपनी जड़ों को कभी भी भूलना नहीं चाहिए बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए इसे संजोकर रखना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि हरियाणवी संस्कृति को आगे बढ़ाना हम सभी का दायित्व है और चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जीन्द ने इस महोत्सव के माध्यम से हरियाणवी संस्कृति को नई दिशा दी है, जिसके लिए समस्त विश्वविद्यालय परिवार बधाई और तारिफ के काबिल है। विधानसभा जींद के जनप्रतिनिधि श्री जवाहर सैनी ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन युवाओं में सामाजिक जागरूकता के साथ-साथ प्रदेश की समृद्ध परंपराओं के प्रति गर्व की भावना को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया और सभी को हरियाणा दिवस की शुभकामनाएँ दीं।
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा के कुलपति प्रो. विजय अरोड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवा पीढ़ी को अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में इस प्रकार के आयोजन को देखकर मुझे बड़ा हर्ष हुआ और मैं इनके सांस्कृतिक कार्यों की सराहना करता हूँ। उन्होंने विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय अनुशासन, ज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में बेहद तेज गति से प्रगति कर रहा है।
चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय भिवानी की कुलपति प्रो. दीप्ति धर्मानी ने कहा कि छात्र जिस सक्रियता और उत्साह के साथ इन प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं, वह हरियाणा की सशक्त युवा शक्ति का संकेत है। उन्होंने कहा कि “शिक्षा और संस्कृति का संयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण का आधार है। ऐसे कार्यक्रम नवचेतना, दृढ़ता और सामाजिक समर्पण को जन्म देते हैं।”
राज्य सूचना आयुक्त श्री कर्मवीर सैनी ने सूचना का अधिकार अधिनियम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और सुशासन के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि युवाओं को लोकतांत्रिक प्रणाली में अपनी भूमिका और अधिकारों की समझ अवश्य होनी चाहिए।
समारोह का दूसरा दिन न सिर्फ सांस्कृतिक उत्कर्ष का उदाहरण रहा, बल्कि यह छात्रों और अतिथियों के लिए एक प्रेरणादायी अनुभव भी बना। विश्वविद्यालय का परिसर पूरे दिन ढोलक, नगाड़ों, लोकगीतों और रंगीन परिधानों की विविधता से गूंजता रहा। हर प्रस्तुति ने हरियाणा की पहचान, संघर्ष, परंपरा और बदलते समाज के नए आयामों को बारीकी से उकेरा।
दिन के समापन पर यह स्पष्ट था कि सीआरएसयू का हरियाणा दिवस समारोह केवल कार्यक्रमों का सिलसिला नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति की पहचान को उजागर करने और नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का एक सशक्त अभियान बन चुका है। समारोह का दूसरा दिन कला, संस्कृति, उत्साह, एकता और गौरव का भव्य संगम बनकर सभी की स्मृतियों में लंबे समय तक अंकित रहेगा।