स्वस्थ महिला ही स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण करती है।- पलविंदर कौर

November 5, 2025

चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद के महिला प्रकोष्ठ द्वारा विश्वविद्यालय में छात्राओं एवं महिला कर्मचारियों के लिए उनके स्वास्थ्य एवं स्वच्छता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, आज स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।
महिला प्रकोष्ठ की संयोजिका डॉ निशा देउपा ने स्वागत भाषण में कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस प्रकार की गतिविधियाँ छात्राओं को न केवल आत्मनिर्भर बनाती हैं, बल्कि उन्हें समाज के प्रति उत्तरदायित्व का एहसास भी कराती हैं।
कुलपति प्रो. राम पाल सैनी अपने संदेश में कहा कि स्वच्छता केवल बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक अनुशासन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज के समय में महिलाओं के लिए स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक रहना अत्यंत आवश्यक है। स्वस्थ शरीर ही आत्मविश्वास और सफलता की नींव रखता है। उन्होंने विश्वविद्यालय में ऐसे सार्थक कार्यक्रमों के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि महिला प्रकोष्ठ समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
मुख्य अतिथि श्रीमती पलविंदर कौर, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षा विभाग, हरियाणा सरकार तथा रिसोर्स पर्सन डॉ. सुमन कोहली, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सिविल अस्पताल, जींद ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधनों से श्रोताओं को गहन ज्ञान एवं व्यावहारिक बुद्धिमत्ता प्रदान की।
श्रीमती पलविंदर कौर ने अपने ओजस्वी संबोधन में घरेलू एवं कार्यस्थल पर स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रोटोकॉल अपनाने की अनिवार्यता पर बल दिया। उन्होंने संतुलित पोषण, तनाव प्रबंधन एवं स्वच्छता को गरिमापूर्ण एवं उत्पादक जीवन का आधार बताया। उन्होंने कहा, “सच्चा सशक्तिकरण स्व-देखभाल से शुरू होता है।” उन्होंने महिलाओं को घर एवं कार्यक्षेत्र में उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. सुमन कोहली ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की महिलाओं के स्वास्थ्य दिशानिर्देशों पर विस्तृत प्रकाश डाला, जिसमें शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक कल्याण को परिभाषित किया गया। उन्होंने दैनिक स्वच्छता आदतों पर जोर देते हुए निम्नलिखित बिंदु गिनाए:
• कम से कम 40-60 सेकंड तक साबुन से हाथ धोना
• संक्रमण रोकने हेतु नियमित मौखिक स्वच्छता
• नियमित स्नान एवं साफ अंतःवस्त्रों का उपयोग
• गरिमापूर्ण एवं सुरक्षित मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन
विशेष रूप से पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) पर चर्चा करते हुए डॉ. कोहली ने इसके प्रमुख कारण बताए: गतिहीन जीवनशैली, जंक फूड, तनाव एवं खराब स्वच्छता। समाधान के रूप में उन्होंने सुझाव दिए:
✔ प्रसंस्कृत भोजन के स्थान पर पोषक तत्वों से भरपूर आहार ✔ प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि ✔ मानसिक स्वच्छता हेतु स्वयं की तुलना न करना एवं माइंडफुलनेस अपनाना
उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान की सराहना करते हुए इसे जन-जन तक स्वच्छता जागरूकता पहुंचाने का शक्तिशाली माध्यम बताया तथा विश्वविद्यालय समुदाय से इसके दूत बनने का आह्वान किया।
कुलसचिव प्रो. लवलीन मोहन ने कहा, " महिला प्रकोष्ठ का उद्देश्य महिलाओं को स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में जागरूक करना है। हमें महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए काम करना होगा। महिला सशक्तिकरण के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों ही महत्वपूर्ण हैं और हमें इन पर विशेष ध्यान देना होगा।"
अंत में महिला प्रकोष्ठ की संयोजिका डॉ निशा देउपा ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन नियमित रूप से किया जाएगा ताकि छात्राएँ स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर समाज में उदाहरण प्रस्तुत कर सकें।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।