चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद में हरियाणा महोत्सव का शुभारंभ आज से।
हरियाणवी संस्कृति का महासंगम: 28, 29 व 30 नवंबर को मनाया जाएगा ‘हरियाणा उत्सव’
चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जीन्द द्वारा तीन दिवसीय ‘हरियाणा उत्सव’ का भव्य आयोजन आगामी 28, 29 और 30 नवंबर 2025 को किया जाएगा। इस सांस्कृतिक महोत्सव का उद्देश्य हरियाणवी संस्कृति, लोककला, लोकनृत्य तथा प्रदेश की पारंपरिक विरासत को संरक्षित और प्रोत्साहित करना है। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित होने वाला यह उत्सव विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं स्थानीय समुदाय के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
इस अवसर पर डॉ कृष्ण लाल मिडा डिप्टी स्पीकर हरियाणा, मोहनलाल बडोली अध्यक्ष बीजेपी हरियाणा, श्री महिपाल ढांडा शिक्षा मंत्री हरियाणा, श्री देवेंद्र अत्रि विधायक उचाना, श्री राम कुमार गौतम विधायक सफीदों, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डीपी वत्स, ओएसडी टू सीएम श्री राज नेहरू, पी एस श्री यशपाल कुमार IAS, श्री अनूप लाठर आदि की गरिमामयी उपस्थित रहेगी।
इस हरियाण महोत्सव में श्री सुमित सैनी, अनु हरियाणवी, सोमवीर कथूरवाल, श्री अमन जाजी, श्री अमित ढुल्ल, श्री राज मावर, श्री गजेंद्र फोगाट आदि हरियाणवी कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे।
इस वर्ष उत्सव की थीम “हमारा प्रयास, हरियाणवी संस्कृति का विकास” निर्धारित की गई है। इस थीम के अनुरूप हरियाणा की लोक-परम्पराओं को मंच प्रदान करने हेतु कुल 25 लोक-सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इन प्रतियोगिताओं में हरियाणवी लोकगीत, रागिनी, सांग, लोकनृत्य, गजल, कविता पाठ, भजन, लोक वाद्य वृन्द, वेशभूषा प्रदर्शन, कहानी लेखन, लोककथा पाठ, तथा हरियाणवी नाटक/थियेटर जैसे विविध कार्यक्रम शामिल होंगे।
उत्सव के दौरान हरियाणा की पारंपरिक वेशभूषा संस्कृति, रसिया समूह गायन, व्यक्तिगत व सामूहिक लोक नृत्य, पंचवर्णा लोकगीत, और लोक वाद्यों की मधुर गूंज जैसी प्रस्तुतियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इस आयोजन के माध्यम से विश्वविद्यालय नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और प्रदेश की धरोहर को व्यापक मंच देने का सतत प्रयास कर रहा है।
कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से प्रतिभागिता सुनिश्चित की गई है तथा विद्यार्थी उत्साहपूर्वक विभिन्न मंचीय एवं गैर-मंचीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की तैयारी कर रहे हैं।
तीनों दिनों में प्रातः से सायं तक लोकगीत, नृत्य, नाट्य और विविध प्रस्तुतियों से पूरा परिसर हरियाणवी संस्कृति की सुगंध से महक उठेगा।
कार्यक्रम संयोजकों ने बताया कि ‘हरियाणा उत्सव’ केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का मंच ही नहीं, बल्कि युवाओं में आत्मगौरव, सांस्कृतिक चेतना और परंपराओं के प्रति सम्मान जगाने का एक प्रभावी माध्यम है।
अंत में विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और नागरिकों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में उपस्थित होकर ‘हरियाणा उत्सव’ को सफल तथा यादगार बनाएं।
