पुस्तकें ज्ञान की स्थायी धरोहर हैं। विश्वविद्यालय में पठन-संस्कृति को सशक्त करना हमारा दायित्व है।” – कुलगुरु सीआरएसयू में दो दिवसीय पुस्तक मेले के दूसरे दिन उमड़ा ज्ञान-प्रेमियों का उत्साह देश-विदेश के 65 प्रकाशकों की सहभागिता से सजा विश्वविद्यालय परिसर चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद में दो दिवसीय पुस्तक मेले के दूसरे दिन भी रहा उत्साहपूर्ण माहौल

February 11, 2026

पुस्तकें ज्ञान की स्थायी धरोहर हैं। विश्वविद्यालय में पठन-संस्कृति को सशक्त करना हमारा दायित्व है।” - कुलगुरु

सीआरएसयू में दो दिवसीय पुस्तक मेले के दूसरे दिन उमड़ा ज्ञान-प्रेमियों का उत्साह

देश-विदेश के 65 प्रकाशकों की सहभागिता से सजा विश्वविद्यालय परिसर

चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद में दो दिवसीय पुस्तक मेले के दूसरे दिन भी रहा उत्साहपूर्ण माहौल

चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद में कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के मार्गदर्शन में आयोजित दो दिवसीय पुस्तक मेले के दूसरे दिन भी उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस ज्ञानोत्सव में विद्यार्थियों, शोधार्थियों, अध्यापकों तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।

पुस्तक मेले में देश-विदेश के 65 प्रतिष्ठित प्रकाशकों ने भाग लिया। विभिन्न स्टॉलों पर शैक्षणिक, शो धपरक, साहित्यिक, प्रतियोगी परीक्षाओं, व्यक्तित्व विकास, खेल विज्ञान, भारतीय संस्कृति, सामान्य ज्ञान, प्रबंधन, योग एवं आयुर्वेद सहित अनेक विषयों से संबंधित पुस्तकों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने पुस्तकों का अवलोकन किया तथा अपनी रुचि के अनुसार क्रय भी किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. अनिल ने कहा कि पुस्तक मेला केवल पुस्तकों की खरीद-फरोख्त का मंच नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, विचार और संवाद का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में पठन-पाठन की आदत को बढ़ावा मिलता है और वे पाठ्यक्रम के अतिरिक्त भी नई जानकारियाँ प्राप्त करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि डिजिटल युग में भी पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण सामग्री के चयन में ऐसे मेले अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं।

उन्होंने बताया कि देश-विदेश के 65 पब्लिशर विश्वविद्यालय में हिस्सा लेने के लिए आए हुए हैं उनके पास विभिन्न प्रकार के ऑथर्स और राइटर की बुक्स है जो विद्यार्थियों के लिए ही नहीं बल्कि सुधार थी शिक्षक व गैर शिक्षक कर्मचारियों के लिए बहुत ही फायदेमंद है इस बुक फेयर में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ खेल को सामान्य ज्ञान भारतीय परंपरा संस्कृति वैज्ञानिक और हर प्रकार के सरकारी एग्जाम्स जिन की तैयारी बच्चे आजकल कर रहे हैं पुस्तक देखने के लिए और पढ़ने के लिए मिल जाएंगी।

शारीरिक शिक्षा विभाग से डॉ. नवीन लाडवाल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि खेल और शिक्षा का गहरा संबंध है। एक अच्छा खिलाड़ी बनने के लिए मानसिक सशक्तता और सैद्धांतिक ज्ञान भी उतना ही आवश्यक है। पुस्तक मेले में खेल विज्ञान, स्वास्थ्य एवं फिटनेस से संबंधित पुस्तकों की उपलब्धता विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी है।

शिक्षा विभाग की डॉ. रितु ने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी दोनों के लिए पुस्तकें मार्गदर्शक की भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेला शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को समृद्ध करने का एक सशक्त माध्यम है, जहाँ नवीन शोध, शिक्षण विधियों और समकालीन विषयों पर आधारित साहित्य सहज उपलब्ध होता है।

संगीत विभाग की डॉ. कविता एवं डॉ. कृष्ण ने संयुक्त रूप से कहा कि संगीत केवल कला नहीं, बल्कि संस्कृति और संवेदनाओं का प्रतिबिंब है। उन्होंने बताया कि संगीत, साहित्य और दर्शन से जुड़ी पुस्तकों ने विद्यार्थियों को विशेष रूप से आकर्षित किया। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में रचनात्मकता और सौंदर्य बोध का विकास होता है।

समाजशास्त्र विभाग की डॉ. पूनम ने कहा कि समाज और समय को समझने के लिए पुस्तकों से बेहतर माध्यम कोई नहीं हो सकता। समाजशास्त्र, समकालीन मुद्दों, महिला अध्ययन एवं सामाजिक परिवर्तन से जुड़ी पुस्तकों में विद्यार्थियों ने विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेला विद्यार्थियों को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है।

प्रबंधन विभाग से डॉ सुधा यादव ने कहा कि प्रबंधन के विद्यार्थियों के लिए नेतृत्व, उद्यमिता, व्यक्तित्व विकास और आर्थिक विषयों से संबंधित पुस्तकों का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस मेले में प्रबंधन विषय की नवीनतम पुस्तकों की उपलब्धता विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक रही।

विद्यार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए।

योग विभाग के विद्यार्थियों ने कहा कि योग, आयुर्वेद, मानसिक स्वास्थ्य और जीवनशैली प्रबंधन से संबंधित पुस्तकों ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया।

प्रबंधन विभाग के छात्रों ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं, स्टार्टअप, मार्केटिंग और लीडरशिप से संबंधित पुस्तकों ने उनके ज्ञानवर्धन में सहायक भूमिका निभाई।

वहीं शारीरिक शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों ने खेल मनोविज्ञान, पोषण और फिटनेस से जुड़ी पुस्तकों में गहरी रुचि दिखाई और ऐसे आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की।

पुस्तक मेले के दूसरे दिन का वातावरण अत्यंत सकारात्मक और ज्ञानवर्धक रहा। विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी ने यह सिद्ध कर दिया कि आज भी पुस्तकों के प्रति लोगों का आकर्षण बना हुआ है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग प्रदान किया।

समापन अवसर पर सभी ने इस प्रकार के शैक्षणिक और ज्ञानवर्धक आयोजनों को भविष्य में भी निरंतर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि विश्वविद्यालय में अध्ययन-अध्यापन का वातावरण और अधिक समृद्ध हो सके।