युवाओं में डोपिंग एवं नशीली दवाओं के दुरुपयोग पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन: नशामुक्त एवं सशक्त युवा निर्माण की ओर एक सार्थक पहल
हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तथा विश्वविद्यालय के माननीय कुलगुरु प्रो. (डॉ.) राम पाल सैनी द्वारा सम्मेलन के ब्रोशर का विधिवत विमोचन किया गया। यह अवसर युवाओं की सुरक्षा, जागरूकता और स्वस्थ भविष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद द्वारा युवाओं में डोपिंग एवं नशीली दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग जैसी गंभीर और समकालीन चुनौती पर केंद्रित एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय बहु-विषयी सम्मेलन का आयोजन 27 फरवरी 2026 को किया जा रहा है। “युवा जोखिम में: डोपिंग एवं नशीली दवाओं का दुरुपयोग” विषय पर आधारित यह सम्मेलन वर्तमान समय की एक अत्यंत संवेदनशील समस्या पर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर विमर्श का मंच प्रदान करेगा।
युवा किसी भी राष्ट्र की शक्ति, ऊर्जा और उज्ज्वल भविष्य के प्रतीक होते हैं। जब वे नशीली दवाओं और प्रदर्शन बढ़ाने वाले प्रतिबंधित पदार्थों के प्रभाव में आते हैं, तो उनके शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक जीवन पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ता है। डोपिंग न केवल खेल की पवित्र भावना के विपरीत है, बल्कि यह नैतिकता, ईमानदारी और अनुशासन के मूल्यों को भी आघात पहुंचाती है। अतः इस समस्या के समाधान हेतु जागरूकता, वैज्ञानिक शोध, नीति-निर्माण और सामाजिक सहभागिता अत्यंत आवश्यक है।
यह सम्मेलन शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, खेल विशेषज्ञों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को एक साझा मंच पर लाकर बहु-विषयी दृष्टिकोण से इस चुनौती का समाधान खोजने का प्रयास करेगा। सम्मेलन के माध्यम से दीर्घकालिक रणनीतियों, प्रभावी नीतियों एवं सामूहिक प्रयासों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा।
इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. (डॉ.) राम पाल सैनी ने अपने संबोधन में कहा,
“युवा हमारे राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी हैं। यदि हम उन्हें नशे और डोपिंग जैसी बुराइयों से सुरक्षित नहीं रख पाए, तो एक सशक्त और विकसित भारत की परिकल्पना अधूरी रह जाएगी। शिक्षण संस्थानों का दायित्व केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों, अनुशासन और स्वस्थ जीवन शैली के प्रति प्रेरित करना भी है।
डोपिंग और नशीली दवाओं का दुरुपयोग एक सामाजिक चुनौती है, जिसके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। शिक्षा, परामर्श, शोध और जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से ही हम युवाओं को सही दिशा दे सकते हैं। यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”
कुलसचिव डॉ. राजेश बंसल ने कहा, “इस समस्या के समाधान के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। कठोर नीतियां, निरंतर जागरूकता और सामाजिक सहयोग के माध्यम से ही हम युवाओं को सुरक्षित वातावरण प्रदान कर सकते हैं।”
एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक डॉ. नवीन लाडवाल ने कहा, “राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं में सामाजिक उत्तरदायित्व और नैतिक चेतना विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। नशा मुक्ति को जन-आंदोलन का रूप देकर ही हम व्यापक सामाजिक परिवर्तन ला सकते हैं।”
यह सम्मेलन युवाओं में बढ़ते डोपिंग एवं नशीली दवाओं के खतरे के विरुद्ध जागरूकता फैलाने, संवाद को सुदृढ़ करने तथा सामूहिक कार्रवाई को प्रेरित करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।
हम सभी का साझा संकल्प होना चाहिए—
नशामुक्त, स्वस्थ एवं सशक्त युवा ही एक मजबूत, प्रगतिशील और समृद्ध राष्ट्र की आधारशिला हैं।
आइए, हम सभी मिलकर एक स्वस्थ, सशक्त एवं नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में सक्रिय योगदान दें।
