वैश्विक मंच पर उभरता सीआरएसयू: माननीय राज्यपाल के समक्ष शोध उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण- प्रो. राम पाल सैनी
वैश्विक मंच पर उभरता सीआरएसयू: राज्यपाल के समक्ष शोध उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण- प्रो. राम पाल सैनी
प्रो. असीम कुमार घोष, माननीय महामहिम राज्यपाल हरियाणा द्वारा चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद के अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग बुलेटिन का विमोचन किया गया। इस बुलेटिन में चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद के द्वारा किए गए सभी MoUs एवं जो भी अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग स्थापित किए गए हैं उनका विवरण है।
माननीय कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के नेतृत्व में यह विश्वविद्यालय की बहुत बड़ी उपलब्धि है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी ने राज्यपाल को बुलेटिन भेंट करते हुए विश्वविद्यालय की वैश्विक शोध उपलब्धियों, अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों तथा भावी रणनीतिक योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल की धर्मपत्नी श्रीमती मित्रा घोष को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया।
अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग बुलेटिन- विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित वैश्विक अकादमिक साझेदारियों, हस्ताक्षरित MoUs, संयुक्त शोध परियोजनाओं तथा शोध उपलब्धियों का समग्र दस्तावेज है। इसके अंतर्गत भारत–जापान उच्च शिक्षा मिशन के तहत जापान की प्रतिष्ठित संस्थाओं—Kyoto University, Osaka Metropolitan University, Kansai University, University of Tokyo, Sophia University तथा Japan External Trade Organization के साथ स्थापित शैक्षणिक एवं शोध सहयोग का विवरण सम्मिलित है। इन साझेदारियों के माध्यम से संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी सहयोग, छात्र एवं संकाय विनिमय तथा वैश्विक अकादमिक नेटवर्क विस्तार को गति मिली है।
विश्वविद्यालय ने विश्व के अग्रणी वैज्ञानिकों—Armando J. L. Pombeiro तथा Brij Mohan—के साथ शोध सहयोग स्थापित किया है, जो पुर्तगाल स्थित Instituto Superior Técnico एवं Universidade de Lisboa के Centro de Química Estrutural से संबद्ध है।
इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय का शोध कार्य “Non-architectural assisted MXene and MOF materials for high-performance oil–water separation” प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्था Elsevier द्वारा प्रकाशित जर्नल Separation and Purification Technology (Q1, Impact Factor 9.0) में स्वीकृत हुआ है, जो पर्यावरण संरक्षण विशेषकर तेल–जल पृथक्करण संबंधी तकनीकी चुनौतियों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस शोध में RWTH Aachen University, Indian Institute of Technology Indore तथा Panjab University सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का सहयोग रहा।
विश्वविद्यालय में लगभग 60 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक Central Instrumentation Laboratory (CIL) स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना भी बुलेटिन में उल्लिखित है। यह प्रयोगशाला अंतःविषयी शोध को प्रोत्साहित करने, शोधार्थियों को उन्नत उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा उद्योग–अकादमिक सहयोग को सुदृढ़ बनाने में सहायक होगी।
वैश्विक सहयोग को संस्थागत स्वरूप प्रदान करने के लिए विश्वविद्यालय में ‘अंतरराष्ट्रीय संबंध निदेशालय’ एवं ‘अंतरराष्ट्रीय संबंध प्रकोष्ठ’ का गठन किया गया है। निदेशालय में प्रो. विशाल वर्मा (निदेशक), डॉ. विजय कुमार (उप-निदेशक) एवं डॉ. नरेश कुमार (सहायक निदेशक) को दायित्व सौंपे गए हैं, जबकि प्रकोष्ठ में डॉ. राकेश सिंहमार, डॉ. निशा देऊपा, डॉ. अलका सेठ, डॉ. अरुण कुमार एवं डॉ. जयपाल मान को सदस्य नामित किया गया है।
साथ ही विश्वविद्यालय ने डॉ. वीरेंद्र एवं डॉ. संदीप कुमार को अंतरराष्ट्रीय विजिटिंग रिसर्चर के रूप में नामित कर संयुक्त शोध एवं वैश्विक अकादमिक सहभागिता को नई दिशा दी है।
कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी ने कहा कि यह बुलेटिन विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति, नवाचार एवं वैश्विक पहचान को सुदृढ़ करने वाला ऐतिहासिक दस्तावेज है और विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग, विशेषकर QS World University Rankings में स्थापित करने की दिशा में एक सशक्त कदम है। राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, नवाचार एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएंगे।
