अतुल्य भारत” के अंतर्गत सांस्कृतिक कार्यक्रम का दूसरा दिन: लोक संस्कृति के रंगों में रंगा विश्वविद्यालय परिसर. देश के कोने-कोने से आए कलाकारों ने लोक संस्कृति का बिखेरा जादू

March 19, 2026

अतुल्य भारत” के अंतर्गत सांस्कृतिक कार्यक्रम का दूसरा दिन: लोक संस्कृति के रंगों में रंगा विश्वविद्यालय परिसर. देश के कोने-कोने से आए कलाकारों ने लोक संस्कृति का बिखेरा जादू लोक कलाओं के संगम से जीवंत हुआ विश्वविद्यालय का मंच परंपरा, संगीत और नृत्य का संगम: फेस्टिवल के दूसरे दिन छाया उत्साह लोक नृत्यों की शानदार प्रस्तुतियों से सराबोर हुआ “अतुल्य भारत” कार्यक्रम जींद,17 मार्च : चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में “अतुल्य भारत” कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय फोक डांस फेस्टिवल का दूसरा दिन रंग, उत्साह और सांस्कृतिक विविधता से भरपूर रहा। देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने अपनी पारंपरिक लोक नृत्य शैलियों की मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया और पूरे परिसर को लोक संस्कृति के रंगों में सराबोर कर दिया।

यह भव्य सांस्कृतिक उत्सव 16 मार्च से 18 मार्च तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश के कोने-कोने से आए कलाकार भारत की समृद्ध लोक परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन कर रहे हैं। कार्यक्रम के दूसरे दिन हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड के चेयरमैन धर्मवीर मिर्जापुर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

अपने संबोधन में धर्मवीर मिर्जापुर ने कहा कि यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की गौरवशाली परंपराओं, विविध संस्कृतियों और समृद्ध विरासत का उत्सव है। उन्होंने कहा कि भारत को विविधताओं का देश कहा जाता है, जहाँ हर कुछ किलोमीटर पर भाषा, खान-पान, पहनावा और परंपरा बदल जाती हैं, लेकिन इन सबके बीच हमारी साझा भारतीय संस्कृति हमें एक सूत्र में बांधे रखती है। यही संस्कृति हमें एकता, भाईचारे और सह-अस्तित्व का संदेश देती है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर अत्यंत विशाल और विविधतापूर्ण है। हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता, अनेक भाषाएँ, विभिन्न धर्म, लोक परम्परा, शास्त्रीय कलाओं और अनगिनत लोक नृत्य एवं संगीत की परंपरा हमारे देश को अद्वितीय बनाती हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है और हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने में भी मदद मिलती है।

कार्यक्रम के दूसरे दिन लगभग 120 कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आज उत्तराखंड, नागालैंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश और पंजाब से आए कलाकारों ने अपनी-अपनी लोक कलाओं का शानदार प्रदर्शन किया। रंग-बिरंगे परिधानों, पारंपरिक संगीत और जोशीले नृत्य ने माहौल को जीवंत बना दिया। हर प्रस्तुति में उस क्षेत्र की संस्कृति, इतिहास और जीवनशैली की झलक देखने को मिली।

इस दौरान कुल आठ प्रस्तुतियां दी गईं, जिनमें प्रत्येक प्रस्तुति ने दर्शकों को अलग-अलग राज्यों की सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराया। दर्शकों ने भी कलाकारों की हर प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साह बढ़ाया।

समग्र रूप से, फोक डांस फेस्टिवल का दूसरा दिन भारत की “अनेकता में एकता” की भावना को साकार करता नजर आया। यह आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकता का भी सशक्त संदेश देने में सफल रहा।

मंच पर प्रस्तुत हर नृत्य में उस क्षेत्र की परंपरा, जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधान, लोक संगीत की मधुर धुनें और कलाकारों की ऊर्जा से भरपूर अभिव्यक्ति ने कार्यक्रम को अत्यंत आकर्षक और यादगार बना दिया। दर्शक भी पूरे उत्साह के साथ हर प्रस्तुति का आनंद लेते नजर आए और तालियों की गूंज से कलाकारों का हौसला बढ़ाते रहे।

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए संयोजक डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि इस तीन दिवसीय आयोजन में देशभर से आए कलाकार अपनी-अपनी लोक संस्कृति का परिचय दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम होते हैं, बल्कि विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक धरोहर को एक मंच पर लाकर आपसी समझ, सम्मान और एकता को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने बताया कि यह भव्य आयोजन एनसीडीसी प्रयागराज द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जबकि चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय इस कार्यक्रम का मेजबान बनकर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ रामपाल सैनी के निर्देशन में विश्वविद्यालय प्रशासन और आयोजन समिति द्वारा सभी कलाकारों और अतिथियों के लिए उत्कृष्ट व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, जिससे कार्यक्रम सुचारू रूप से संचालित हो रहा है।

इस फोक डांस फेस्टिवल के माध्यम से “अनेकता में एकता” की भारतीय भावना सजीव होती नजर आई। अलग-अलग राज्यों की लोक कलाओं ने यह सिद्ध किया कि भले ही हमारी भाषाएं, वेशभूषा और परंपराएं अलग-अलग हों, लेकिन हमारी सांस्कृतिक आत्मा एक ही है। यह आयोजन न केवल कलाकारों के लिए अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच बना, बल्कि दर्शकों के लिए भी भारत की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने और समझने का एक सुनहरा अवसर साबित हो रहा है।