चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के कुशल मार्गदर्शन में संगीत एवं नृत्य विभाग द्वारा एक अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया
चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के कुशल मार्गदर्शन में संगीत एवं नृत्य विभाग द्वारा एक अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसका विषय “राग, लय और न्यूरोकेमिस्ट्री : प्राचीन ज्ञान एवं आधुनिक विज्ञान” रहा।
इस विशेष अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में गुरुग्राम से पधारे प्रख्यात संगीत निर्देशक श्री गोविंद सरस्वती ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। संगीत एवं संगीत चिकित्सा (म्यूजिक थेरेपी) के क्षेत्र में लगभग 30 वर्षों के अपने दीर्घ अनुभव के आधार पर उन्होंने विद्यार्थियों को संगीत के वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक पक्षों से अवगत कराया।
अपने व्याख्यान में श्री गोविंद सरस्वती जी ने विस्तार से बताया कि भारतीय शास्त्रीय संगीत के राग और लय केवल मनोरंजन के साधन नहीं हैं, बल्कि यह मानव मस्तिष्क, भावनाओं और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालते हैं। उन्होंने कहा, “राग हमारे मनोभावों को नियंत्रित करने की क्षमता रखते हैं और लय हमारे शरीर की आंतरिक संरचनाओं के साथ तालमेल स्थापित करती है। जब हम संगीत को समझकर सुनते और साधना करते हैं, तो यह हमारे मस्तिष्क में सकारात्मक न्यूरोकेमिकल परिवर्तन उत्पन्न करता है, जिससे तनाव कम होता है, एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक संतुलन स्थापित होता है।
उन्होंने आगे यह भी कहा कि आधुनिक विज्ञान अब उन तथ्यों की पुष्टि कर रहा है, जिन्हें हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष पहले अनुभव के आधार पर स्थापित किया था। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे संगीत को केवल एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि एक साधना और जीवन शैली के रूप में अपनाएं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. जसबीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के व्याख्यान विद्यार्थियों के बौद्धिक एवं रचनात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा, “प्राचीन भारतीय संगीत परंपरा और आधुनिक विज्ञान का यह संगम विद्यार्थियों को नई दृष्टि प्रदान करता है। ऐसे कार्यक्रम न केवल ज्ञानवर्धन करते हैं, बल्कि विद्यार्थियों को शोध और नवाचार के लिए भी प्रेरित करते हैं।” उन्होंने मुख्य वक्ता का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके बहुमूल्य विचार और अनुभव विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।
इस अवसर पर विभाग के प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने संगीत और म्यूजिक थेरेपी से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका मुख्य वक्ता ने विस्तार पूर्वक और संतोषजनक उत्तर दिया। समापन पर सभी ने इस प्रकार के और अधिक शैक्षणिक आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया।
इस मौके पर डॉ भावना, डॉ कविता, डॉ कृष्ण ,डॉ रामदिया, डॉ राकेश आदि मौजूद रहे।
