चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के मार्गदर्शन में महात्मा ज्योतिराव फुले एवं डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के तीसरे दिन भव्य एवं प्रेरणादायक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के मार्गदर्शन में महात्मा ज्योतिराव फुले एवं डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के तीसरे दिन भव्य एवं प्रेरणादायक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
इस प्रदर्शनी में दोनों महान विभूतियों के जीवन, उनके संघर्ष, सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध उनके आंदोलनों तथा शिक्षा, समानता और न्याय के लिए किए गए उनके योगदान को चित्रों, पोस्टरों, लेखों एवं विभिन्न रचनात्मक माध्यमों के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी ने अपने संदेश में कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले एवं डॉ. अंबेडकर के विचार आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने तथा समतामूलक समाज के निर्माण पर बल दिया।
प्रो. सैनी ने यह भी कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनी का उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक चेतना विकसित करना और उन्हें समानता एवं मानवता के मूल्यों के प्रति जागरूक करना है। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और प्रेरणा प्राप्त की।
वहीं कुलसचिव प्रो. सीमा गुप्ता ने अपने विस्तृत उद्बोधन में कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल ऐतिहासिक तथ्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी, संवेदनशीलता, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूकता भी विकसित करती है।
उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में युवा पीढ़ी को ऐसे महापुरुषों के विचारों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे समाज में व्याप्त असमानताओं को समझ सकें और उनके समाधान में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को न केवल ज्ञान प्रदान करते हैं, बल्कि उन्हें एक सजग, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राकेश सिंहमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रदर्शनी का उद्देश्य विद्यार्थियों को महान विचारकों के जीवन से जोड़ना और उनमें सामाजिक न्याय, समानता तथा शिक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को प्रेरित करते हैं कि वे अपने जीवन में इन आदर्शों को अपनाकर समाज के उत्थान में योगदान दें।
यह प्रदर्शनी विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणास्पद रही। कार्यक्रम के माध्यम से समाज में समरसता, समानता एवं शिक्षा के महत्व का सशक्त संदेश प्रसारित हुआ। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी प्रेरित करते हैं।
