चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के मार्गदर्शन में ललित कला विभाग द्वारा आयोजित ‘पांच दिवसीय कला प्रदर्शनी’ के अंतिम दिन भी विद्यार्थियों की रचनात्मकता और कला कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन देखने को मिला।
चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के मार्गदर्शन में ललित कला विभाग द्वारा आयोजित ‘पांच दिवसीय कला प्रदर्शनी’ के अंतिम दिन भी विद्यार्थियों की रचनात्मकता और कला कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन देखने को मिला। प्रदर्शनी में मूर्तिकला, पेंटिंग एवं स्केचिंग जैसी विभिन्न विधाओं में तैयार की गई कलाकृतियों ने सभी दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया और कला प्रेमियों को एक अलग अनुभव प्रदान किया।
विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से आए विद्यार्थियों एवं अध्यापकों ने प्रदर्शनी का भ्रमण किया और विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। प्रदर्शनी में प्रस्तुत हर कलाकृति अपने आप में एक अनूठी कहानी और गहरा संदेश लिए हुए थी, जिसने दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी ने कहा कि इस प्रकार की कला प्रदर्शनी विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ उनकी संवेदनशीलता और सामाजिक चेतना को भी विकसित करती हैं। उन्होंने कहा कि कला समाज का दर्पण होती है और विद्यार्थियों को अपनी रचनाओं के माध्यम से सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए।
डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. विशाल वर्मा ने विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम ही नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का भी कार्य करती है। उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और उन्हें रचनात्मक सोच के लिए प्रेरित करती हैं।
प्रो. कुलदीप नारा ने भी विद्यार्थियों के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रत्येक कलाकृति अपने भीतर एक विशेष संदेश समेटे हुए होती है, जिसे समझना और समाज तक पहुँचाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी कला के माध्यम से सामाजिक मुद्दों को उजागर करने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजेश बंसल ने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनी विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने का सशक्त माध्यम होती हैं और उन्हें अपनी सृजनात्मक अभिव्यक्ति के लिए एक बेहतर मंच प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें अपनी कला को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रेरणा मिलती है।
इस मौके पर ओएसडी टू वाइस चांसलर डॉ. विजय कुमार, डॉ. अतुल सहारनपुर, वीरेंद्र आचार्य सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विद्यार्थियों की कला को नमन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। सभी अतिथियों ने मूर्तिकला के माध्यम से प्रस्तुत संदेशों को गहराई से समझा और विद्यार्थियों के प्रयासों की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
प्रदर्शनी के सफल आयोजन ने न केवल विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान किया, बल्कि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और सांस्कृतिक वातावरण को भी समृद्ध बनाया। अंत में, ललित कला विभाग के संकाय सदस्यों ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे रचनात्मक आयोजनों को जारी रखने का संकल्प लिया।
