सीआरएसयू जींद का डिजिटलाइजेशन की ओर ऐतिहासिक कदम “तीसरी आंख से रखी जाएगी विद्यार्थियों पर नजर, कुलगुरु ने किया कंट्रोल रूम ओर परीक्षा केंद्रों का दोरा
सीआरएसयू जींद का डिजिटलाइजेशन की ओर ऐतिहासिक कदम “तीसरी आंख से रखी जाएगी विद्यार्थियों पर नजर, कुलगुरु ने किया कंट्रोल रूम ओर परीक्षा केंद्रों का दोरा
पारदर्शी परीक्षाओं की दिशा में बड़ा बदलाव
चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद ने प्रदेश में परीक्षा प्रणाली को आधुनिक, पारदर्शी और नकल मुक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए डिजिटलाइजेशन आधारित परीक्षा व्यवस्था लागू की है। विश्वविद्यालय हरियाणा का पहला ऐसा विश्वविद्यालय बन गया है जिसने परीक्षाओं में डिजिटल निगरानी प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करते हुए प्रत्येक परीक्षा कक्ष में डिजिटल कैमरों की व्यवस्था की है, ताकि विद्यार्थियों की प्रत्येक गतिविधि परसतत निगरानी रखी जा सके।
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम परीक्षा प्रणाली को पूर्णतः नकल मुक्त, पारदर्शी एवं अनुशासित बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल माना जा रहा है। डिजिटल कैमरों के माध्यम से परीक्षा केंद्रों की लाइव मॉनि टरिंग की जा रही है, जिसके लिए विश्वविद्यालय परिसर में विशेष कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। इस कंट्रोल रूम के माध्यम से विश्वविद्यालय प्रशासन सभी परीक्षा केंद्रों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता को तुरंत रोका जा सके।
विश्वविद्यालय कुलगुरु प्रो.राम पाल सैनी ने परीक्षा केंद्रों एवं कंट्रोल रूम का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों एवं परीक्षा ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों को परीक्षा प्रक्रिया को निष्पक्ष एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कुलगुरु ने परीक्षा केंद्रों पर विद्यार्थियों से भी बातचीत की तथा उन्हें ईमानदारी एवं अनुशासन के साथ परीक्षा देने के लिए प्रेरित किया।
प्रो. सैनी ने कहा कि आज का युग तकनीक और नवाचार का युग है तथा शिक्षा संस्थानों को समय के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल परीक्षाएं करवाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और पारदर्शिता की भावना विकसित करना भी है। डिजिटल निगरानी व्यवस्था परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाएगी तथा विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगी।उन्होंने कहा कि नकल मुक्त परीक्षा व्यवस्था किसी भी शिक्षण संस्थान की सबसे बड़ी पहचान होती है और सीआरएसयू इस दिशा में निरंतर नए आयाम स्थापित कर रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षाओं में पारदर्शिता, दक्षता एवं त्रुटि रहित प्रक्रिया सुनिश्चित करने के उद्देश्य से डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू की गई है। इस प्रणाली के अंतर्गत उत्तर पुस्तिकाओं पर बारकोड का उपयोग करते हुए अभ्यर्थियों की उपस्थिति डिजिटल माध्यम से दर्ज की जाती है। इससे अभ्यर्थियों द्वारा उपस्थिति विवरण भरते समय होने वाली गलत प्रविष्टियों में कमी आएगी तथा परिणाम घोषित होने में होने वाली अनावश्यक देरी की समस्या का प्रभावी समाधान संभव होगा।
इसके अतिरिक्त, चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद द्वारा मई 2026 से आयोजित परीक्षाओं में केंद्रीकृत CCTV निगरानी प्रणाली भी लागू की गई है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य परीक्षाओं के दौरान अनुचित गतिविधियों एवं अनधिकृत व्यवहार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना तथा परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखना है। साथ ही, यह प्रणाली दूरस्थ (Remote) निगरानी तंत्र को मजबूत बनाकर परीक्षा प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष, सुरक्षित एवं विश्वसनीय बनाने में सहायक सिद्ध होगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्थाएं विकसित कर रहा है, जिससे उनकी डिग्री की विश्वसनीयता और गुणवत्ता राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत हो सके।
प्रो. सैनी ने आगे कहा कि विश्वविद्यालय आने वाले समय में शिक्षा,परीक्षा, प्रशासन एवं शोध कार्यों में भी डिजिटल तकनीकों का व्यापक विस्तार करेगा। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से कार्यों में पारदर्शिता, गति और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकती है तथा सीआरएसयू इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक आदर्श एवं आधुनिक विश्वविद्यालय के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
परीक्षा नियंत्रक डॉ राजेश बंसल ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा पहली बार इस प्रकार की डिजिटल परीक्षा निगरानी व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें प्रत्येक परीक्षा कक्ष को कैमरों से जोड़ा गया है। कंट्रोल रूम से सभी परीक्षा केंद्रों पर एक साथ नजर रखी जा रही है, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई संभव हो सकेगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन का उद्देश्य केवल नकल रोकना ही नहीं,बल्कि विद्यार्थियों को एक निष्पक्ष एवं स्वस्थ परीक्षा वातावरण उपलब्ध करवाना भी है। डिजिटल तकनीक के माध्यम से परीक्षा संचालन अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बन सकेगा।
सीआरएसयू जींद द्वारा उठाया गया यह ऐतिहासिक कदम न केवल परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा,बल्कि प्रदेश में डिजिटल एवं पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था की नई शुरुआत भी मानी जा रही है
