चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के खेल परिषद एवं क्रीड़ा भारती हरियाणा के संयुक्त तत्वावधान में “इंडियन फिलॉसफी एवं मिशन ओलंपिक्स 2036” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर में किया गया।

March 27, 2026

चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के खेल परिषद एवं क्रीड़ा भारती हरियाणा के संयुक्त तत्वावधान में “इंडियन फिलॉसफी एवं मिशन ओलंपिक्स 2036” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर में किया गया।

सम्मेलन का शुभारंभ समारोह विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के मुख्य अतिथि में आयोजित हुआ, जबकि विश्वविद्यालय की कुलसचिव प्रो. सीमा गुप्ता विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के अंतर्गत तकनीकी सत्रों की श्रृंखला आयोजित की गई, जिसमें प्रातःकालीन सत्रों में टेक्निकल सेशन-1 एवं टेक्निकल सेशन-2 तथा दोपहर भोजन के उपरांत टेक्निकल सेशन-3 एवं टेक्निकल सेशन-4 का आयोजन किया गया। इसके पश्चात समापन समारोह आयोजित हुआ, जिसमें श्री दीप भाटिया, सदस्य हरियाणा ह्यूमन राइट्स कमिशन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. अरविंद मलिक (कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र), डॉ. राजीव चौधरी (डिपार्टमेंट ऑफ फिजिकल एजुकेशन, PRSU, छत्तीसगढ़) शामिल हुए |

इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर से प्रोफेसर, रिसोर्स पर्सन, शोधकर्ता एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया। अब तक 320 प्रतिभागियों ने अपने पंजीकरण की पुष्टि की, जो इस आयोजन की व्यापकता और महत्व को दर्शाता है।

इस अवसर पर उद्घाटन संबोधन देते हुए श्री रामानंद जी, अखिल भारतीय मंत्री क्रीड़ा भारती एवं जनरल सेक्रेटरी, वॉलीबॉल ऑफ इंडिया ने कहा कि भारत में खेलों की अपार संभावनाएं निहित हैं। उन्होंने युवाओं को अनुशासन, समर्पण एवं निरंतर अभ्यास को अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि उचित मार्गदर्शन और पर्याप्त अवसर मिलने पर भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने क्रीड़ा भारती द्वारा खेल संस्कृति के विकास हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की।

विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी ने अपने संदेश में कहा कि “भारतीय दर्शन हमारे जीवन मूल्यों का आधार है, जो हमें अनुशासन, संयम और उत्कृष्टता की प्रेरणा देता है। यदि इन सिद्धांतों को खेलों के साथ जोड़ा जाए, तो हमारे खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। मिशन ओलंपिक्स 2036 भारत के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है और इस दिशा में ऐसे अकादमिक आयोजनों की अहम भूमिका है।” उन्होंने आयोजन समिति एवं विश्वविद्यालय खेल परिषद को शुभकामनाएं भी दीं।

विशिष्ट अतिथि प्रो. सीमा गुप्ता ने कहा कि “इस प्रकार के राष्ट्रीय सम्मेलन विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं को अपने विचार साझा करने और नई दिशा में सोच विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं। भारतीय दर्शन और खेलों का समन्वय वर्तमान समय की आवश्यकता है, जिससे युवाओं का समग्र विकास संभव हो सके।”

मुख्य वक्ता डॉ. अरविंद मलिक (कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र) ने बताया कि यदि भारत को 2036 ओलंपिक में मेडल हासिल करने हैं, तो खिलाड़ियों को विशेष ढंग से प्रशिक्षित करना होगा। खिलाड़ियों को स्वास्थ्य के साथ-साथ तकनीक से जोड़ना आवश्यक है, जिसमें विभिन्न कंपनियों द्वारा खेल के अनुसार जूते और परिधान डिजाइन किए जा रहे हैं, जिससे खिलाड़ियों के प्रदर्शन और ऊर्जा स्तर में वृद्धि हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि खिलाड़ियों को अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए तथा स्टेरॉयड और अन्य हानिकारक सप्लीमेंट से दूर रहना चाहिए, क्योंकि ये शरीर को कमजोर कर देते हैं और प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि भारत में खेलों को बड़े स्तर पर महत्व दिया जा रहा है और खिलाड़ियों के लिए सरकार द्वारा निरंतर निवेश किया जा रहा है। अच्छे खिलाड़ियों के निर्माण के लिए अच्छे कोचों की आवश्यकता है। विदेशी कोचों की सहायता से खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर भारत में ही उत्कृष्ट कोच तैयार किए जा सकते हैं, जिससे भविष्य में खेलों के प्रति युवाओं की रुचि बढ़ेगी और देश का नाम विश्व स्तर पर ऊंचा होगा।

मुख्य वक्ता डॉ. राजीव चौधरी (डिपार्टमेंट ऑफ फिजिकल एजुकेशन, PRSU, छत्तीसगढ़) ने दर्शनशास्त्र की गहराइयों को समझाते हुए जीवन के वास्तविक अर्थ को उजागर किया। उन्होंने योग दर्शन के माध्यम से बताया कि योग केवल शरीर का अभ्यास नहीं, बल्कि मन, आत्मा और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करने का मार्ग है। भारत दर्शन के विषय में उन्होंने देश की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत को प्रस्तुत किया।

उन्होंने खेलों में योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग से न केवल शारीरिक शक्ति बढ़ती है, बल्कि मानसिक एकाग्रता और आत्मविश्वास भी मजबूत होता है। क्रीड़ा भारती के प्रति अपने समर्पण को दर्शाते हुए उन्होंने बताया कि खेल केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उनकी वाणी में ज्ञान, प्रेरणा और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम दिखाई दिया।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि श्री दीप भाटिया ने अपने संदेश में कहा कि “भारतीय दर्शन हमें नैतिकता, समानता और मानव मूल्यों का बोध कराता है। खेलों के माध्यम से इन मूल्यों को समाज में स्थापित किया जा सकता है। मिशन ओलंपिक्स 2036 युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक लक्ष्य है।”

इस संबंध में जानकारी देते हुए सम्मेलन के आयोजन सचिव एवं खेल निदेशक डॉ. नरेश देशवाल ने बताया कि सम्मेलन के सभी तकनीकी सत्रों में विषय विशेषज्ञों द्वारा शोधपत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें भारतीय दर्शन और खेलों के विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा की गई।

यह राष्ट्रीय सम्मेलन शिक्षा, दर्शन एवं खेलों के समन्वय का एक सशक्त मंच सिद्ध हुआ, जिससे युवाओं को नई दिशा एवं प्रेरणा प्राप्त हुई।