चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के प्रबंधन विभाग में शोधार्थी रेनू यादव का प्री-सबमिशन वाइवा अत्यंत सफल, सुव्यवस्थित एवं शैक्षणिक दृष्टि से समृद्ध वातावरण में आयोजित किया गया।
चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के प्रबंधन विभाग में शोधार्थी रेनू यादव का प्री-सबमिशन वाइवा अत्यंत सफल, सुव्यवस्थित एवं शैक्षणिक दृष्टि से समृद्ध वातावरण में आयोजित किया गया। इस महत्वपूर्ण अकादमिक सेमिनार का मुख्य उद्देश्य शोधार्थी द्वारा अब तक किए गए शोध कार्य का समग्र एवं गहन मूल्यांकन करना तथा अंतिम शोध प्रबंध प्रस्तुत करने से पूर्व आवश्यक, सारगर्भित एवं रचनात्मक सुझाव प्रदान करना था, ताकि शोध की गुणवत्ता को और अधिक उत्कृष्ट बनाया जा सके और यह अकादमिक मानकों पर पूर्णतः खरा उतर सके।
इस अवसर पर शोधार्थी रेनू यादव ने अपने शोध विषय पर एक विस्तृत, सुव्यवस्थित, तथ्यपरक एवं प्रभावशाली प्रस्तुति दी। उन्होंने अपने अध्ययन के उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करते हुए अनुसंधान की पद्धति, डेटा संग्रहण की प्रक्रिया, नमूना चयन, विश्लेषण के विभिन्न उपकरणों एवं तकनीकों, प्रमुख निष्कर्षों तथा शोध के व्यावहारिक एवं शैक्षणिक महत्व पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उनकी प्रस्तुति न केवल विषय की गहराई को दर्शाती थी, बल्कि उनके शोध के प्रति समर्पण, गंभीरता एवं विश्लेषणात्मक क्षमता को भी प्रतिबिंबित करती थी। प्रस्तुति में प्रयुक्त आंकड़ों, चार्ट्स एवं उदाहरणों ने उनके शोध को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।
इस सेमिनार में विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. जसवीर सुरा एवं प्रोफेसर एस. के. सिन्हा विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर परीक्षकों ने शोध की गुणवत्ता, विषय की समसामयिक प्रासंगिकता तथा उसके सामाजिक एवं शैक्षणिक महत्व की सराहना की। उन्होंने रेनू यादव को अपने शोध कार्य को और अधिक परिष्कृत, संतुलित एवं प्रभावशाली बनाने के लिए प्रेरित किया।
प्रश्नोत्तर सत्र भी अत्यंत रोचक एवं प्रभावशाली रहा। इस दौरान शोधार्थी रेनू यादव ने पूरे आत्मविश्वास, स्पष्टता, तार्किकता एवं विषय पर गहरी पकड़ के साथ सभी प्रश्नों के संतोषजनक एवं सारगर्भित उत्तर दिए। उनके उत्तरों ने यह सिद्ध किया कि उन्हें अपने शोध विषय का गहन ज्ञान है और वे अपने निष्कर्षों को उचित रूप से प्रस्तुत करने में सक्षम हैं। उपस्थित सभी शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने उनकी प्रस्तुति शैली, संप्रेषण कौशल एवं बौद्धिक क्षमता की सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. अजमेर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि प्री-सबमिशन वाइवा शोधार्थियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं निर्णायक चरण होता है। यह न केवल उनके शोध कार्य की गुणवत्ता का आकलन करने का अवसर प्रदान करता है, बल्कि उन्हें अपने शोध को अंतिम रूप देने से पूर्व उसमें आवश्यक सुधार, संशोधन एवं परिष्कार करने का भी अवसर देता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अकादमिक आयोजन शोधार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ उनकी बौद्धिक क्षमता को भी निखारते हैं।
अंत में उन्होंने शोधार्थी रेनू यादव को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं तथा उन्हें इसी प्रकार उत्कृष्ट एवं गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य करते रहने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का समापन सकारात्मक ऊर्जा, ज्ञानवर्धक चर्चा एवं शैक्षणिक उत्साह के साथ हुआ, जिसने सभी उपस्थित जनों को प्रेरित किया।
