सीआरएसयू, जींद में महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती धूमधाम से मनाई गई, कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी ने युवाओं को दिया वैदिक मूल्यों पर चलने का संदेश
चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय (सीआरएसयू), जींद में आर्य समाज के संस्थापक, महान चिंतक एवं समाज सुधारक महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती श्रद्धा, गरिमा और उत्साह के साथ मनाई गई। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों तथा कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और महर्षि दयानंद के आदर्शों को स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि दयानंद सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ किया गया। इसके उपरांत आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने महर्षि दयानंद के जीवन, उनके संघर्ष, वैदिक पुनर्जागरण में उनकी भूमिका तथा सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध उनके आंदोलन पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने “वेदों की ओर लौटो” का आह्वान कर भारतीय समाज को नई चेतना प्रदान की। उन्होंने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समानता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हुए अंधविश्वास, जाति प्रथा और सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध सशक्त आवाज उठाई। उनके विचार आज भी समाज को जागरूक, प्रगतिशील और नैतिक मूल्यों पर आधारित बनाने की प्रेरणा देते हैं।
प्रो. सैनी ने कहा कि “महर्षि दयानंद सरस्वती केवल एक धार्मिक नेता नहीं थे, बल्कि वे एक महान राष्ट्र निर्माण और सामाजिक क्रांति के अग्रदूत थे। उन्होंने भारतीय समाज को सत्य, तर्क और वैदिक ज्ञान के आधार पर पुनर्संगठित करने का मार्ग दिखाया। आज के युवाओं को उनके आदर्शों को आत्मसात कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लेना चाहिए।”
वहीं कुलसचिव डॉ. राजेश बंसल ने अपने वक्तव्य में कहा कि “शिक्षा ही वह माध्यम है जो समाज को अज्ञानता और कुरीतियों से मुक्त कर सकती है। महर्षि दयानन्द का जीवन हमें सिखाता है कि साहस, सत्यनिष्ठा और दृढ़ संकल्प से किसी भी सामाजिक बुराई का अंत किया जा सकता है। विश्वविद्यालय परिवार उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने महर्षि दयानंद सरस्वती के दिखाए मार्ग पर चलने, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने तथा नैतिक और मानवीय मूल्यों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। वातावरण देशभक्ति, वैदिक आदर्शों और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत रहा।
