चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के मार्गदर्शन में डॉ. भीमराव अंबेडकर लाइब्रेरी द्वारा 23 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

April 23, 2026

चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के मार्गदर्शन में डॉ. भीमराव अंबेडकर लाइब्रेरी द्वारा 23 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला “आध्यात्मिक आयामों की खोज: चेतना की ज्ञान शक्ति” विषय पर आधारित होगी। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम टीबी-1 में दोपहर 3:00 बजे किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एवं मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर डॉ. राज नेहरू (ओएसडी टू सीएम, हरियाणा) उपस्थित रहेंगे । गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में प्रोफेसर राजवीर पराशर (आरकेएसडी कॉलेज, कैथल) तथा डॉ. दिनेश दधीचि (सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, अंग्रेज़ी विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय) उपस्थित रहेंगे। इस कार्यशाला के संरक्षक के रूप में कुलगुरु प्रोफेसर राम पाल सैनी उपस्थित रहेंगे ।

इस कार्यशाला के संरक्षक के रूप में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) राम पाल सैनी का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

इस कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को चेतना (Consciousness) की शक्ति को गहराई से समझने का अवसर मिलेगा, जिससे वे अपने विचारों और भावनाओं को बेहतर ढंग से नियंत्रित कर सकेंगे। साथ ही, उन्हें मानसिक तनाव प्रबंधन और एकाग्रता बढ़ाने की प्रभावी तकनीकों की जानकारी प्राप्त होगी, जो उनके शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत जीवन में सहायक सिद्ध होंगी। यह कार्यशाला विद्यार्थियों में आत्मविश्वास एवं सकारात्मक सोच का विकास करेगी तथा उन्हें जीवन के आध्यात्मिक और व्यावहारिक पक्षों के बीच संतुलन स्थापित करने की प्रेरणा देगी। इसके अतिरिक्त, व्यक्तित्व विकास और लक्ष्य निर्धारण के लिए उपयोगी मार्गदर्शन भी प्राप्त होगा, जिससे वे अपने भविष्य को अधिक स्पष्टता और दिशा के साथ आगे बढ़ा सकेंगे।

इस कार्यक्रम के आयोजक डॉ. अनिल कुमार, उप-लाइब्रेरियन, डॉ. भीमराव अंबेडकर पुस्तकालय, सीआरएसयू, जींद हैं। उनके कुशल मार्गदर्शन एवं समन्वय में इस राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। डॉ. अनिल कुमार का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ उसके आध्यात्मिक आयामों से भी जोड़ना है, ताकि उनका समग्र व्यक्तित्व विकास हो सके। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में नई सोच, सकारात्मक दृष्टिकोण और आत्मविकास की भावना को प्रोत्साहित करते हैं तथा उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।