महापुरुषों की जयंती पर अवकाश नहीं, जागरूकता और सेवा का संदेश: कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी
चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद में कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के कुशल मार्गदर्शन में महात्मा ज्योतिबा फुले एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन पौधारोपण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के साथ डॉ. अजमेर सिंह, डॉ. नरेश देसवाल, डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. अतुल सहारण, डॉ. वीरेंद्र आचार्य, डॉ. अनिल कुमार, श्री सुरेश कुमार (पी.एस. टू वीसी) तथा श्री सुरेंद्र खरब सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि वृक्षारोपण केवल एक औपचारिक गतिविधि नहीं, बल्कि यह हमारी सामाजिक, नैतिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी है। उन्होंने महात्मा ज्योतिबा फुले एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर के महान विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि इन महापुरुषों ने समाज में समानता, शिक्षा, सामाजिक न्याय और जागरूकता का जो प्रकाश फैलाया, वह आज भी हमारे लिए मार्गदर्शक है।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि महापुरुषों के जन्मदिवस केवल अवकाश के रूप में मनाने तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनके जीवन, संघर्ष और आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज हित में सार्थक कार्य करने चाहिए। ऐसे अवसरों पर हमें जागरूकता फैलाने, समाज को जोड़ने और सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
कुलगुरु प्रो. सैनी ने आगे कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी नियमित देखभाल करनी चाहिए, क्योंकि वृक्ष ही हमारे जीवन का आधार हैं। उन्होंने विद्यार्थियों और स्टाफ से आह्वान किया कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं और एक स्वच्छ, हरित एवं स्वस्थ समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राकेश सिहमार ने बताया कि इस तीन दिवसीय आयोजन का उद्देश्य महापुरुषों के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना और समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों और कर्मचारियों में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को सुदृढ़ करते हैं और सभी को प्रकृति के संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित सदस्यों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया और भविष्य में भी इस प्रकार के जन जागरूकता कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आश्वासन दिया।
