शिक्षा से जागरूक बनो, संगठित रहो और समानता के लिए संघर्ष करो।- प्रो (डॉ) राम पाल सैनी
चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के कुशल मार्गदर्शन में महात्मा ज्योतिराव फुले एवं डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम का आज प्रथम दिवस उत्साह एवं गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो (डॉ) राम पाल सैनी मुख्य वक्ता के रूप में अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व, विचार और चरित्र निर्माण का आधार है। उन्होंने कहा कि सच्ची शिक्षा वही है जो मनुष्य में तार्किक सोच, व्यावहारिक ज्ञान, नैतिक मूल्यों और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस उत्पन्न करे।
उन्होंने आगे कहा कि महात्मा ज्योतिराव फुले और डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अपने विचारों और कार्यों से समाज में समानता, न्याय और मानवाधिकारों की जो अलख जगाई, वह आज भी प्रासंगिक है। युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अपने भीतर नेतृत्व क्षमता विकसित करनी चाहिए और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे शिक्षा को केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित न रखें, बल्कि उसे समाज और राष्ट्र की सेवा का माध्यम बनाएं।
डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135 वीं जयंती के संदर्भ में उन्होंने कहा कि वे भारतीय संविधान के निर्माता थे, जिन्होंने देश के प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार प्रदान किए। उनका यह विचार कि “शिक्षा शेरनी का दूध है” आज भी युवाओं को सशक्त बनने की प्रेरणा देता है।
प्रो.सैनी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय के युवा डॉ. अंबेडकर की जीवनी से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान महात्मा ज्योतिराव फुले के जीवन पर आधारित एक प्रेरणादायक "फुले" फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया, जिससे विद्यार्थियों को उनके संघर्ष और समाज सुधार के कार्यों को समझने का अवसर मिला।
साथ ही, 13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड के शहीदों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने बताया कि यह घटना भारतीय इतिहास का एक अमिट और पीड़ादायक अध्याय है, जिसने देशवासियों में स्वतंत्रता के प्रति जागरूकता और बलिदान की भावना को और प्रबल किया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राकेश सिंहमार ने भी महात्मा ज्योतिराव फुले एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन एवं उनके सामाजिक उत्थान में दिए गए योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि महात्मा ज्योतिराव फुले ने वर्ष 1848 में महिला शिक्षा की नींव रखते हुए पहला विद्यालय स्थापित किया और समाज में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए महिलाओं को शिक्षा, सम्मान एवं समान अधिकार दिलाने के लिए लंबा संघर्ष किया।
कार्यक्रम के अंत में छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. जसबीर सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
यह आयोजन विद्यार्थियों में शिक्षा, समानता, सामाजिक न्याय एवं राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।
इस अवसर पर सभी ने संकल्प लिया कि वे महात्मा ज्योतिराव फुले, डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं देश के वीर शहीदों के आदर्शों का अनुसरण करते हुए एक सशक्त, समतामूलक और प्रगतिशील भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे।
